समीक्षा – “वो अज़ीब लड़की”

प्रियंका ओम का कहानी संग्रह ” वो अजीब लड़की” पढ़ा, पढ़ कर समझ आया कि सोशल मीडिया पर उनकी इतनी ज़बरदस्त फैन फॉलोइंग यूँ ही नहीं है। यदि मैं इस कहानी संग्रह की तुलना इंद्रधनुष से करूँ तो अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि उनकी कहानियों में इंद्रधनुष के सभी रंग समाहित हैं। संग्रह की प्रत्येक कहानी एक मोती की तरह है और हर मोती का अपना एक रूप, रंग, आकर, चमक और मूल्य है।

कहानियों को पढ़ ऐसा आभास होता है कि उन्होंने कहानियों को जिया है और फिर उसे शब्दों में गढ़ा है। हर कहानी उनकी अपनी कहानी लगती है। कहानियों में एक सम्मोहन है जो पाठक को अनंत पाश में जकड़ लेता है। कहानियों के अंत पाठक को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देते हैं जो उसे विस्मित कर देता है और उसके दृष्टिकोण को एक नया आयाम देता है।

कहानियों का विषयवस्तु परस्पर भिन्न भिन्न है किंतु कहीं ना कहीं हर कहानी व्यक्ति व समाज के सरोकारों से सरोकार रखती है और प्रियंका ने इन सरोकारों को बहुत मज़बूती के साथ अपनी कहानियों में दर्शाया है। कहानियों में आज के युवा की भावनाओं का प्रतिनिधित्व बखूबी किया गया है। कहानियों को काल खंड के साथ जोड़ने वाले शब्द, सिम्बल्स, उदाहरण, उपमाएं और घटनाएं हैं जो पाठक को कहानियों से जोड़ते हैं और कहानी को रोचकता से भर देते हैं।

विवशता, असुरक्षा, शोषण, प्रेम, संयोग, वियोग, असमंजस, अंतर्द्वंद आदि जीवन के सभी पहलुओं को कहानी रोचक ढंग से उठाती हैं। कहानियों में बचपन का प्रेम है, प्रेमी से बिछुड़ना है तो फिर किसी अनजान मोड़ पर मिल जाना भी है, परिवार की जिम्मेदारियां हैं, फिरंगी महिला के प्रति आकर्षण है, छलिया बॉस के साथ एक अजीब सा संबंध है, रिश्तों की बेड़ियों को तोड़ प्रेम को हासिल करने का सुख है। कोई कहानी ज़िंदगी को फ्लैशबैक में ले जाती है वहीं आमुख कहानी में दो पीढ़ियों के बीच की दोस्ती है और दोनों पीढ़ियां एक दूसरे को अपने नज़रिए से समझाना चाहते हैं। ग्रामीण परिदृश्य और उसकी अपनी समस्याएं हैं तो शहर भी है और उसकी चमक धमक भी।

कुल मिलाकर युवा वर्ग के मन की बात कहने वाली कहानियां हैं और अन्य पाठकों को भी आज के युवक-युवतियों के जीवन और चुनौतियों से रूबरू कराती है।

– सचिन देव शर्मा