जयपुर बुक मार्क

इस वर्ष जनवरी में प्रसिद्ध जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल के व्यापारिक खंड (बी टू बी सेगमेंट) “जयपुर बुक मार्क” में गेस्ट डेलिगेट के रूप में प्रतिभागिता करने का अवसर प्राप्त हुआ। निमंत्रण उनके 26 जनवरी के सत्र में उपस्थिति हेतु था। क्योंकि 26 जनवरी को सत्र सुबह सवा ग्यारह बजे से शुरू होना था इसलिए एक दिन पहले ही पहुंचने का निर्णय लिया और 25 जनवरी को भी “जयपुर बुक मार्क” के सत्रों में अपनी उपस्तिथि दर्ज कराने का कार्यक्रम बना डाला।

25 जनवरी की सुबह दिल्ली से फ्लाइट पकड़कर साढ़े आठ बजे जयपुर एयरपोर्ट पहुँच गया। फिर वहाँ से होटल और होटेल से सीधा दिग्गी पैलेस। दिग्गी पैलेस ही वो जगह है जहाँ पर इस साल की तरह हर साल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल एवं जयपुर बुक मार्क का आयोजन किया जाता है। दिग्गी पैलेस के एक भाग को जिसमे जयपुर बुक मार्क का आयोजन किया जाता है उसको आयोजकों ने नाम दिया है, जे बी एम हवेली और शायद प्रायोजकों का नाम उपसर्ग के रूप में प्रयोग किया गया है। पूरा नाम हुआ राजकमल जे बी एम हवेली।

सवा ग्यारह बजे से जे बी एम पवेलियन जो कि जे बी एम हवेली के प्रथम तल पर था, में देश विदेश से आये फेस्टिवल डायरेक्टर्स का गोलमेज सम्मेलन था, मैंने भी दर्शक के रूप में प्रतिभागिता की। फेस्टिवल डायरेक्टर्स वो लोग थे जो देश-विदेश में कहीं ना कहीं लिट्रेचर फेस्टिवल या अन्य साहित्यिक सम्मेलन आयोजित करते हैं। सभी लोग अपने अपने विचार रख रहे थे और उनका फेस्टिवल अन्य फेस्टिवल्स से किस तरह भिन्न है और वो अपने आयोजनों में किस प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे है, मुख्य रूप से इन्हीं विषयों पर चर्चा चल रही थी। सत्र बहुत ही सूचनात्मक और प्रेरित करने वाला रहा। नेपाल लिट्रेचर फेस्टिवल के आयोजक अजित बराल ( Ajit Baral ), पटना लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजक अजित प्रधान ( Ajit Pradhan) , कुमाऊं फेस्टिवल ऑफ लिटरेचर एंड आर्ट्स की आयोजिका जान्हवी प्रसाद (Janhavi Prasad), जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की आयोजिका नमिता गोखले ( Namita Gokhale ) कुछ ऐसे नाम हैं जो मुझे याद रह गए।

जे बी एम हवेली के प्रथम तल पर ही जे बी एम झरोखा नाम की एक छोटी बैठक में साढ़े बारह बजे से कॉपीराइट राउंड टेबल का आयोजन था। करीब एक सवा घंटे जे बी एम पवेलियन में डायरेक्टर्स राउंड टेबल सुनने के बाद मैं जे बी एम झरोखे में चल रही कॉपीराइट राउंड टेबल में हिस्सा लेने के लिए चला आया। इस सत्र में प्रकाशक, लेखक, लिटरेरी एजेंट्स एवं लॉ फर्म्स के प्रतिनिधि अपने अपने दृष्टिकोण से कॉपीराइट के विषय में चर्चा कर रहे थे और मौजूद श्रोता अपनी अपनी जरूरत के हिसाब से विशेषज्ञों को सुन रहे थे और अपने संशयों को दूर करने के लिए उनसे प्रश्न पूछ रहे थे। मेरा प्रश्न इंटरनेट पर मौजूद ऑनलाइन कंटेंट का संदर्भ किताबों में किस तरह लिया जाए जिससे वो विधिसम्मत हो, को लेकर था। जिसका विशेषज्ञों ने बखूबी जवाब दिया। सत्र के पैनल में उपस्थित विशेषज्ञों में कुछ विशेषज्ञों के नाम जो मुझे याद हैं वो हैं वाणी प्रकाशन की अदिति माहेश्वरी गोयल (Aditi Maheshwari Goyal) , राजकमल प्रकाशन समूह के आलिंद माहेश्वरी ( Alind Maheshwari ), अर्पिता दास ( Arpita Das ), प्रशस्ति रस्तोगी ( Prashasti Rastogi ), आनंद एंड आनंद लॉ फर्म (Anand & Anand Law Firm) के साफ़िर आनंद ( Safir Anand ) आदि। इस सत्र के दौरान सूरत से आयी रोशनी त्रिवेदी ( Roshni Trivedi) से मुलाकात हुई। रोशनी बिज़नेस स्टोरीज़ ( Business Stories ) नामक बुक सीरीज संस्था में कार्यरत हैं जो कि किताब के व्यवसाय से ही संबंधित है।

सत्र के पश्चात मुम्बई से जयपुर बुक मार्क में प्रतिभागिता करने के लिए आई लेखिका अनुषा सिंह से भी मिला। अनुषा एक कथेतर (Non-Fiction) लेखिका हैं। उनके लेख हिंदुस्तान टाइम्स, द ट्रिब्यून, द स्पीकिंग ट्री सहित अन्य प्रिंट और डिजिटल माध्यमों पर प्रकाशित हो चुके।

आनंद एंड आनंद लॉ फर्म की पार्टनर ट्विंकि रामपाल ( Twinky Rampal) एवं आनंद एंड आनंद लॉ फर्म की ही ट्रेडमार्क एवं कॉन्ट्रैक्टचुअल कमर्शियल आई पी आरुषि ( Arushi Walia )वालिया से भी मुलाकात हुई और विज़िटिंग कार्ड की अदला बदली भी हुई और एक दूसरे से परिचय भी। सत्र खत्म होते होते लगभग ढाई बजे बज गए थे, भूख लग आई थी। दोपहर के खाने के लिए मैं जेबीएम हवेली से बाहर निकल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के मुख्य कार्यक्रमों की झलक लेता हुआ डेलिगेट लंच एरिया की और बढ़ चला। खाना खा कर शीघ्र ही वापस लौटना था क्योंकि अगला सत्र जिसमें मैं उपस्थित रहना चाहता था वो जे बी एम पवेलियन में पौने चार बजे से था।

लंच के पश्चात ठीक समय से जे बी एम पवेलियन वापस आ गया। जे बी एम का ये सत्र “अनुवाद: ट्रांसलेटिंग इंडिया” बहुत ही रुचिकर रहा। हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा की लोकप्रिय पुस्तकों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में और उन भाषाओं की पुस्तकों का हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए निजी एवं सरकारी क्षेत्र के प्रकाशक किस तरह से प्रयासरत हैं, इस मुद्दे पर चर्चा हुई। कुछ वक्ताओं के नाम जो इस समय मुझे याद आ रहे हैं वो हैं कन्नन सुंदरम ( Kannan Sundaram, साहित्य अकादमी ( Sahitya Academy ) से निरुपमा कोतरु ( Nirupama Kotru ), नेशनल बुक ट्रॅस्ट ( National Book Trust) से रीटा चौधरी ( Rita Chowdury ) एवं राजकमल प्रकाशन समूह ( Rajkamal Publication House ) से सत्यानंद निरुपम ( Stayanand Nirupam )।

शाम को होटेल क्लार्क आमेर में होने वाले जयपुर म्यूजिक स्टेज के कार्यक्रम में भी शिरकत करने का कार्यक्रम था। लेकिन वहाँ के लिए निकलने से पहले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के एक सत्र “गांव कनेक्शन” को भी मैं सुनना चाहता था। मशहूर स्टोरीटेलर नीलेश मिश्रा ( Nilesh Misra ) उस सत्र के वक्ताओं में से एक थे। सो निकल पड़ा जे बी एम हवेली से कल फिर से वापस आने के लिए इस आशा के साथ कि कल का दिन और भी रूचिकर होगा।

26 जनवरी की सुबह जल्दी से तैयार हो, नाश्ता कर समय से होटेल से निकल गया। कार्यक्रम यह था कि जे बी एम के सत्र से पहले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उस सत्र को भी सुना जाए जिसका आयोजन सुबह दस बजे से मुगल टेंट में होना था। स्टोरीटेलर नीलेश मिश्रा को उस सत्र में वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने अपनी किस्सागोई के सफर की कहांनी को बहुत दिलचस्प तरीके से सुनाया एवं एक बड़ी दिलचस्प कहानी और भी सुनाई। मेरे उस प्रश्न का भी उत्तर दिया जो नए लेखकों की कहानियों को उनके रेडियो शो पर सम्मलित करने से संबंधित था। उन्होंने “मंडली” ( Mandali ) नाम की अपनी उस पहल के बारे में भी बताया जिसके माध्यम से लेखक अपनी कहानियां उनके शो में सम्मलित किया जाने के लिए दे सकते हैं। सत्र समाप्ति के तुरंत बाद मैंने अपनी पुस्तक भी नीलेश मिश्रा जी को भेंट की। “मंडली” की लेखिका अनुलता राज नायर ( Anulata Raj Nair ) से भी मुलाकात हुई, वो कंटेंट प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ( Content Project Private Limited ) की एसोसिएट क्रिएटिव हैड है और “मंडली” के लिए निरंतर कहानियां लिखती हैं।

अब मेरा ध्यान घड़ी की ओर गया, सवा ग्यारह बजने वाले थे। “आई राइट माई स्टोरीज” ( I write my stories ) सत्र बस शुरू ही होने वाला था, मैं जे बी एम पविलियन के ओर निकल पड़ा। सत्र शुरू होने में अभी कुछ वक्त बाकी था, मैं मंच के ठीक सामने अग्रिम पंक्ति में पड़ी एक कुर्सी पर बैठ गया। मेरे बैठने के कुछ ही क्षण बाद मेरी पंक्ति में आकर बैठी महिला “आई राइट…” जूरी की सदस्या दीबा सलीम इरफान ( Deeba Salim Irfan ) थीं। दीबा जी से विजिटिंग कार्ड का आदान प्रदान हुआ। उरमा (Urma) एवं चारकोल ब्लश (Charcoal Blush) दीबा जी के क्रमशः लोकप्रिय नावेल एवं कविता संग्रह हैं। वो “द राइट सीन” ( The Write Scene) नामक लेखक समुदाय की संस्थापक भी हैं।

मेरी बराबर वाली सीट पर एक और लेखिका मेघना पंत ( Meghna Pant ) बैठी हुई थीं। उनसे भी परिचय हुआ और विज़िटिंग कार्ड की अदला बदली भी हुए। मेघना “आई राइट..” के अंतर्गत होने वाले सत्र में वक्ता थीं। मेघना “वन एंड हाफ वाइफ” ( One & a Half Wife ), हैप्पी बर्थडे ( Happy Birthday ), द ट्रबल बुक विद वीमेन ( The trouble book with women ), फेमिनिस्ट रानी ( Feminist Rani ) एवं हाऊ टू गेट पब्लिश्ड इन इंडिया ( How to get published in India ) जैसे प्रसिद्ध पुस्तकें लिख चुकी हैं।

सत्र के दौरान कुछ पुस्तकों के विमोचन का भी कार्यक्रम था। ” आई राइट..” के अंतर्गत छांटी गयी दस प्रविष्टियों के लेखकों को उनकी रचनाओं के प्रस्तुतिकरण का अवसर भी प्रदान किया गया। सभी लेखक और लेखिकाओं की प्रस्तुति बहुत ही प्रभावशाली थी। कुछ लेखक एवं लेखिकाओं जैसे सुमीत केशवानी ( Sumeet Keshwani ), गार्गी बॉस ( Gargie Boss ), अरिहंत जैन ( Arihant Jain ), पूजा साहा ( Pooja Saha ) आदि से सत्र के बाद परिचय भी हुआ। राजकमल प्रकाशन समूह के निदेशक (विपणन) श्री आलिंद माहेश्वरी ( Alind Maheshwari ) से भी मुलाकात हुई और उनके साथ प्रसिद्ध यात्रा वृतांत लेखकों के बारे में भी दो मिनट बात हुए।

अब बारी थी जे बी एम के समापन की, जे बी एम हवेली की छत पर खुले आसमान के नीचे आयोजकों ने जे बी एम में आये सभी लेखकों, प्रकाशकों, वक्ताओं, डेलिगेट्स एवं आयोजन समिति के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया और सभी अतिथियों को इस वादे के साथ विदा किया कि दो हज़ार बीस में फिर मिलेंगे।

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