“वारी” आई हैड अ शार्ट ट्रिप

और अंततः वो घड़ी आ ही गई । सीट बेल्ट बांधने के संकेत “ऑन” थे और विमान की गति बढ़ने लगी थी । अब वापस जा पाना मात्र कल्पना में ही संभव था । यात्रा थोड़ी लम्बी थी । पश्चिम दिशा में कुछ घंटों की उड़ान के बाद एक “ट्रांसिट” था फिर दक्षिण – पश्चिम मे लगभग सात घंटे की उड़ान और बाकी थी । लक्ष्य था गुयाना की खाड़ी के किनारे बसा एक शहर लेगोस । “लेगोस” या “लागोस” नाइजीरिया का एक मुख्य शहर है । विमान ऊँचाई पर था और अपने स्मार्ट फोन पर सेव वेब पेज पर एक बार फिर निगाह डालने से मैं खुद को रोक न सका। वह वेब पेज नाइजीरिया के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र होने की कहानी सुना रहा था और मैं नाइजीरिया जा रहा था, but I had a short trip.

पेशे से मैं एक इंजीनियर हूँ और जिन्हें steel plant लगाना हो उनसे मिलना मेरे पेशे का हिस्सा है । फलस्वरूप मुझे ऐसी जगहों  भी जाना होता है जो आम दुनिया के लिए पर्यटन का मुख्य आकर्षण नहीं है । परन्तु अगर पर्यटन मात्र मौज मस्ती के लिए नहीं है तो मेरा अनुभव रहा है कि ऐसे कम आकर्षक स्थान आपको समाज का एक अलग रुप ही दिखाते हैं और आपको सोचने के लिए कुछ विषय दे जाते हैं । इसलिए ऐसे कम चर्चित, कम आकर्षक स्थानों पर जाना मुझे आकर्षित करता है ।

नाइजीरिया के एक उद्योगपाति जो मूलतः भारतीय हैं, ने मेरे German सहकर्मियों से एक summit के दौरान लेगोस में मुलाकात की थी । उसी के तहत मेरी ये यात्रा सुनिश्चित हुई । इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अलावा मैनें उन भारतीयों से भी बात की जो पहले से नाइजीरिया में थे ।

वैसे ऊपर वाले पर आपकी आस्था अक्सर आपको हिम्मत देती है और विमान में बैठ कर घरती से लगभग तीस हजार फीट की ऊंचाई पर मैं ऊपर वाले के थोड़ा पास था और खुद को सुरक्षित महसूस करने का प्रयास कर रहा था । इस यात्रा पर मैं अकेला नहीं था, मेरे तीन और सहकर्मी भी साथ थे । दुबई में flight बदलने के बाद लेगोस की flight में बैठते ही मन को ये दिलासा देते हुए कि नाइजीरिया का दक्षिणी हिस्सा शांत है और लेगोस दक्षिण में है, मैंने आंखे बंद कर लीं और सपनों को कुछ और दिशा देने लगा । आंख खुली तो विमान उतरने की तैयारी में था । इस भारतीय मूल के उद्योगपति के साथ बहुत से भारतीय भी हैं, उन्होंने हमारी इस यात्रा के लिए भरसक प्रयत्न किये थे जिससे हमें कोई असुविधा न हो । उतरने के बाद हम पासपोर्ट कंट्रोल पर ही थे कि फोन पर एक कॉल आया । Peter एक नाइजीरियन था जिसे हमारे मेजबान ने हमारी सहायता के लिए भेजा था । बेल्ट पर से सामान उठाते समय हमने उससे मुलाकात की । उसने हमे बाहर निकलने के लिए कस्टमस् की दिशा दिखाई और आगे मिलने का वादा कर के अचानक कहीं गायब हो गया । एक पुराने से और मात्र मूल सुविधाओं वाले एयरपोर्ट का नजारा लेते हुए हम आगे बढ़े । लगभग बीस पच्चीस साल पहले जब मैने पहली बार दिल्ली एयरपोर्ट देखा था तो वो शायद इससे बेहरत था ।

अचानक लगा कि बहुत सी निगाहें हमे घूर रही हैं । हम विदेशी थे, विदेशी आप के देश में धन ले कर आते हैं । बचपन में जब वाराणसी में गंगा के घाट पर विदेशियों को देखा था तो ये भी देखा था कि दुकानदार, नाव वाले, अक्सर उनसे तीन का तेरह वसूलने का प्रयास करते थे और बख्शीश की भी उम्मीद करते थे, लगभग चालीस साल पहले भारत में अक्सर ऐसा होता था ।

अचानक कस्टमस् ने हमे रोक लिया – Indians! Dollar! Four people! 100 dollar!

मैने कहा – We have a short trip, nothing in my luggage, only cloths.

उन लोगों ने कहा- No, you are Indian, bless us, 100 dollar, then you go or we check your luggage.

ऐसा कुछ होता है मैने सुना था सो पचास डॉलर मे बात बनी । अब Peter हमसे दोबारा मिला और एक लोकल सिम कार्ड की व्यवस्था की । होटल की कार हमारा इंतजार कर रही थी, हमने सामन कार मे डाला, तीनों दोस्त पीछे बैठे और मैं आगे ड्राइवर के बगल मे । ड्राइवर ने हमसे बातें शुरु कर दीं और अंततः उसने कह ही दिया- you are my good friend, hope you will bless me. थोड़ा समय लगा पर जल्दी ही ये बात समझ आ गई कि दोस्ती और blessings कुछ आतिरिक्त धन पाने का संकेत मात्र था । दो डॉलर और पा कर वह भी खुश हो गया ।  शाम हो चली थी, रात हमने होटल में बताई, सुबह सुबह दूसरी flight लेनी थी – “वारी” के लिए जहां चार दिन रूकना था ।

कच्चे तेल की उपलब्धता के आधार पर नाइजीरिया विश्व का सबसे अमीर देश माना जाता है । अमीरी तेल की उपलब्धता की है न कि जन मानस की । “वारी” गुयाना की खाड़ी के किनारे बसा वो शहर है जहां तेल के अधिकांश कुएं हैं । ये कुएं विदेशी कंपानियों के हैं, यानि नाईजीरिया के इस प्राकृतिक संसाधन का फायदा विदेशी कंपानियो को है । “वारी” के जन मानस को इसका अहसास है, यही कारण है कि यहां आने वाले विदेशी उनके लिए दोस्त कम व्यापारी ज्यादा हैं । कुछ वर्ष पहले यहां के एक गुट ने पश्चिम देश की एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का अपहरण कर लिया । उसके बाद से सुरक्षा को ध्यान मे रखते हुए जब भी कोई स्थानीय कंपनी किसी विदेशी को बुलाती है, नाइजीरियन पुलिस का स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप उन्हें सुरक्षा प्रदान करता है । ऐसे ही किसी अनुमव के लिए अब हम “लेगोस” से “वारी” जा रहे थे ।

लेगोस एयरपोर्ट के गेट पर सुरक्षा कर्मी ने हमारे पासपोर्ट और टिकट चेक किए, फिर बड़े आदर से हमे अंदर ले गया । हमें वेटिंग एरिया में बैठाया अपने दो कर्मियों को बुलाया और हमारे लिए चेक इन करने को कहा । हमारे मना करने पर बोला- you sit & relax. चेक इन काउन्टर सामने ही थे, सो हम उन दो कर्मियों को हमारे सामान और टिकट के साथ चेक इन करते देखते रहे । जब वो बोर्डिग पास लेकर आ रहे थे तो इस सुरक्षाकर्मी ने कहा- “see, they did your job, do not forget to bless them”. Short trip के अनुभव बढ़ते ही जा रहे थे ।

खैर थोड़ी देर बाद हम विमान मे बैठ ही गए और छोटा सा विमान छोटी सी उड़ान के बाद “वारी” में उतर गया । मेजबान टीम का एक सदस्य वहां मौजूद था । यह एक दक्षिण भारतीय हैं जो पिछले दस – बारह वर्ष से नाइजीरिया में है, फलस्वरूप नाइजीरिया के प्रति इनका रुझान कुछ अलग ही है ।

बाहर निकलते ही कुछ अफरातफरी दिखी । दो सुरक्षाकर्मी, आधुनिक हाथियारों से लैस, दूसरे वाहनों को हटा दो खास वाहनों के लिए जगह बना चुके थे । हम भी थोड़ा रुक गए, तभी पीछे से आ रहे स्थानीय मित्र ने कहा – सर चलिए आपकी गाड़ियां आ गई हैं । ओह तो ये सुरक्षा हमारे लिए थी ? यानि या तो हम काफी मूल्यवान थे या काफी असुरक्षित । हम दो-दो भारतीय दो-दो कारों में बैठ गए, स्थानीय मित्र भी एक कार में साथ थे । सुरक्षा कार्मियों की कार हमारे आगे थी । हम सीधा अपने मेजबान के कार्यालय पहुंचे । दिन भर के काम के बाद शाम को होटल जाते समय मेजबान से “वारी” के बारे में काफी कुछ पता चला । विदेशी कंपनियों और धन होने के बाद भीं अगर “वारी” की तुलना “लेगोस” से करें तो “लेगोस” एक बेहतर शहर था । “वारी” में जिस होटल मे हम ठहरे उसकी अपनी सुरक्षा व्यवस्था है, यहां तक कि शहर मे उनके अपने लोग है जो अपने अतिथियो संबंधित सुरक्षा गतिविधियों पर नजर रखते हैं । शहर की पुलिस यहां तक की हमारे सुरक्षाकर्मी भी बिना अनुमति होटल के अंदर नहीं आ सकते थे । होटल की मुख्य दीवार के ऊपर कटीले तार लगे थे जिनमें करेंट दौड़  रहा था । हालांकि वारी में एक दिन बीत चुका था परन्तु सुरक्षा की आवश्यकता का अहसास शाम को होटल जा कर ही हुआ । मन को हिम्मत बंधाते हुए सोचा, कोई बात नहीं – it’s a short trip.

मैंने परिस्थिती को थोड़ा और समझने का प्रयास किया। विश्व में ऐसे कई स्थान हैं जहां स्थानीय लोग प्राकृतिक संसाधनों के मूल्य से अनभिज्ञ हैं । बाहरी लोग ऐसे स्थानों पर आ कर इन संसाधनो से फायदा उठाते हैं । ऐसे में स्थानीय लोग या तो गरीब हो जाते हैं या फिर गुलाम सा महसूस करते है क्योंकि शहर की व्यवस्था अब बाहरी लोगों के हाथ में होती है । ऐसे में अगर स्थानीय लोगों पर थोड़े भी प्रतिबंध लग जाए – तब होता है “विरोध” । वैसे बचपन में कई किस्से कहानियां सुनी थीं, कुछ फिल्में भी देखी थी जिनमें किसी “हवेली में भूत हैं” जैसी अफवाह उड़ाई जाती थी, फिर लोग वहां जाना छोड़ देते थे तब शुरु होता था अपराध या फिर किसी एक गुट का एकछत्र अधिकार ।

चुकि I had a short trip, नाइजीरिया या “वारी” के बारे में कोई निर्णय देना जल्दबाजी होगी पर बाकी तीन दिन हम जब भी स्थानीय लोंगों से मिले वे खुशी से मिले, हां आमतौर पर आगे बढ़ कर मिलने का प्रयास नहीं था, या ये कहें कि हमारा सुरक्षा घेरा हमें अ…. अ .…सुरक्षित होने का अहसास करा रहा था ।

वापसी “लेगोस” हो कर ही थी । “वारी” एयरपोर्ट पर एक्स रे मशीन के सामने खड़ी महिला सुरक्षाकर्मी ने week-end के लिए भी हमसे blessings मांगी । पर अब हम अनुभवी हो चले थे, सो बस मुस्करा कर उन्हें thank you कहा ।

लेगोस में एक रात और रुकना था । एयरपोर्ट से बाहर होटल की कार हमारा इंतजार कर रही थी । अभी हम डिक्की में सामान रख ही रहे थे कि एक आदमी ने आगे बढ़ कर हमारी पूरी मदद की । डिक्की बंद कर जब हम कार में बैठने चले तो उस आदमी ने भी blessings चाही । हमने उसे भी thank you कहा । बदले में उसने भी अपनी भाषा में कुछ कहा । उसके चेहरे के हावभाव से लगा कि हम भाग्यशाली थे कि हमे उसकी भाषा नहीं आती थी ।

होटल पहुंच कर कमरे में आराम करना ही सबसे बेहतर विकल्प था । अगले दिन दुबई हो कर वापिस दिल्ली आना था । लेगोस एयरपोर्ट पर पहुंचते ही customs ने फिर हमसे मिलना चाहा पर हम सीधा check in काउंटर्स की तरफ चल पड़े जैसे हमें उनकी बात समझ ही न आई । Passport control officer ने भी अच्छा दोस्त बनने की कोशिश की पर चुंकि we had a short trip और अब समय कम था, और नए दोस्त बनाना हमने जरूरी नहीं समझा ।

कुछ घंटों बाद हम दिल्ली में थे और टैक्सी में घर की तरफ जा रहे थे । FM पर श्रेया घोषाल की मधुर आवाज में फिल्म “तेरे नाल लव हो गया” का एक गीत बज रहा था – मैं वारी जावाँ… मैं वारी जावाँ …

पर July 2018 में नाइजीरिया के शहर “वारी” जाना हमे इस short trip के बारे में बहुत कुछ सोचने को बाध्य कर रहा था । क्या वहां के लोगों का व्यवहार वैसा ही नहीं है जैसा चालीस पचास वर्ष पहले हम भारतीयों का था ? क्या सचमुच “वारी” या नाइजीरिया असुरक्षित है ? क्या बरसों पहले भारत आने वाले विदेशी वैसा ही महसूस करते थे जैसा आज मैं कर रहा हूं ? क्या ऐसा व्यवहार विकासशील समाज का विकास की ओर एक कदम मात्र है ? अगर फिर आवश्यकता पड़ी तो क्या मैं नाइजीरिया जाऊंगा ? क्या किन्हीं कारणों ने नाइजीरिया को कुछ ज्यादा ही पृथक बना दिया है ? क्या वहां के लोग स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं ?

पहली नजर में नाइजीरीया की ड्रग तस्करी, साइबर क्राईम, आतंकवाद अधिक नजर आता है । विश्व के अन्य देशों का नाईजीरीया के बारे में ऐसा सोचना नाइजीरिया के लोगों को थोड़ा संकोची बनाता है । पर इसके अलावा नाइजीरिया के और आकर्षण भी हैं जैसे : 

  • third mainland bridge जो लेगोस को main land से जोड़ता है
  • लेगोस शहर
  • जनसंख्या
  • तितलियां
  • फिल्म इंडस्ट्री
  • सांस्कृतिक विविधता : कहते हैं नाइजीरिया ऐसा देश है जहां रोज़ ही किसी न किसी भाग मे एक त्योहार मनाया जाता है ।

ऊपर लिखे कुछ आकर्षण नाइजीरिया को या मुख्य रूप से “लेगोस” को एक मुख्य पर्यटन स्थल बना देते हैं । नाइजीरिया एवं वहां के लोगों ने अपने प्रयासों से बाकी विश्व को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है । Economic summits और educational summits उद्योगो एवं बुद्धिजीवियों को इस देश में आमंत्रित करते हैं। नाइजीरिया अफ्रीका का एक मुख्य पर विकासशील देश है। अगर मौका मिला तो मै एक बार फिर वहां जाऊंगा और “लेगोस” मे एक दिन ज्यादा बिताने का प्रयास करूंगा।

लगभग एक साल बाद- सूरत के एक होटल में मैं अपने कमरे से निकल कर लिफ्ट की तरफ जा रहा था जहां पहले से ही अफ्रीकी मूल का एक युवक लिफ्ट का इंतजार कर रहा था । हमने एक दूसरे को good morning कहा और मैने उससे पूछ ही लिया – where are you from ? उसने कहा – नाइजीरिया. मैने कहा – I was in “Wari” last year. उसने संकोची होते हुए कहा- oh… rowdy place. मैने मुस्कुरा कर कहा – can’t say, I had a short trip.

 

टिप्पणी: लेख में व्यक्त किए गए विचारों एवं अनुभवों के लिए लेखक ही उत्तरदायी हैं। संस्थापक/संचालक का लेखक के विचारों या अनुभवों से सहमत होना अनिवार्य नहीं है।

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