द सिटी ऑफ़ डेस्टिनी

20200109_122658

9 जनवरी 2020: विशाखापत्तनम एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही शहर को समझने की कवायद शुरू कर दी थी। एयरपोर्ट से होटेल ” द पार्क विशाखापत्तनम ” पहुँचने तक शहर की कुछ झलकियों को कैमरे में कैद कर लिया। ” द सिटी ऑफ़ डेस्टिनी” , ” द सिटी ऑफ़ ज्वेल ” , ” द गोवा ऑफ़ ईस्ट कोस्ट ” माने विशाखापत्तनम, शायद हमारी डेस्टिनी ही हमें यहाँ लाई थी। शहर इतना साफ़ और सुन्दर है कि यहीं बस जाने का मन कर गया। ये शहर धरती, पहाड़ और समुंदर की एक शानदार रिट्रीट है। जहाँ सिम्हाचलम पर्वत इस शहर की प्राचीनता का गवाह है वहीं बंगाल की खाड़ी के किनारे बने पोर्ट ने इस शहर को पहचान दी है।

20200109_123446

शहर शांत है लेकिन आधुनिक भी है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान विशाखापत्तनम की सामरिक भौगोलिक स्थिति के कारण ही पर्ल हारबर से लौटते हुए जापान के विमान वाहक युद्धपोत ने विशाखापत्तनम पोर्ट से लगभग बीस किलोमीटर समुन्दर के अंदर बेडा डाल दिया और विशाखापत्तनम का बर्मा से संपर्क ख़त्म करने के लिए भारतीय सेना के सामरिक ठिकानों पर गोलाबारी की और साथ ही ब्रिटेन के छह जंगी व व्यापारिक जहाज़ों को तबाह कर दिया। शहर में दाख़िल होते ही सिम्हाचलम पर्वत गर्व से अपना सीना चौड़ा कर आपका स्वागत करता है।

20200109_123952

शहर का वो बड़ा क्रासिंग जो उस पर बन रहे फ्लाईओवर के बोझ से कुछ दबा हुआ, कुछ परेशान सा दिखता है, इस उम्मीद पे कि आने वाले समय में वो फ्लाईओवर उसकी सुंदरता को बढ़ाएगा और उस पर पड़ रहे बोझ को काफी हद तक कम कर देगा, वो क्रासिंग इसलिए ही अभी सारी परेशानियां झेलने के लिए तैयार है। आगे आने वाला शहर का वो इलाका जो किसी दूसरे शहर के इलाके जैसा ही लगता है वो है मर्रिपलेम, जिस रोड पर हमारी टैक्सी दौड़ रही है दुकानों के साइनबोर्ड्स पर उस रोड का नाम लिखा है मर्रिपलेम मेन रोड, भीड़भाड़ बहुत ज़्यादा नहीं दिखती, दूसरे शहर के मुकाबले अभी जो फर्क दिखता है वो ये कि दोनों तरफ की सर्विस रोड को मेन ट्रैफिक वाली सड़क से लोहे की ग्रिल लगा कर सेपरेट किया गया है।

20200109_124039उसके बाद कंचारपालेम इलाके से गुज़रते हैं उससे आगे जाने पर बाएं हाथ पर एक मंदिर है, अभी ठीक से याद नहीं लेकिन भगवान विष्णु या भगवान वरहा नरसिंह की बड़ी से तस्वीर मंदिर के बाहर रोड़ पर लगी है, तब मैंने फोटो लेने की कोशिश की थी फ़ोटो धुंधला आया, इस रोड पर दुकानें नहीं दिख रहीं थी। उसके बाद आने वाला रास्ता साफ सुथरा था, लिपे पुते डिवाइडर, फुटपाथ और सड़क के दोनों और पिस्ता हरे रंग की बॉउंड्री वाल पर गहरे हरे रंग से बने पत्ते, ये बाउंड्री वाल एक कृत्रिम जंगल का आभास भी कराती है।

20200109_124328

दाएं और बाएं दोनों तरफ की बाउंड्री वाल के पीछे हरी भरी झाड़ियाँ और पेड़ उस पुरे इलाके को एक ऐसी सीनरी में बदल देते हैं जो मन को बहुत सुहाती है। दाएं बाउंड्री वाल के पीछे कुछ गुलाबी क्वार्टर भी दिख रहे हैं मानों झाड़ियों में गुलाब के कुछ फूल खिले हों। कुछ और सुन्दर चौराहे, चौराहों पर लगे बुत, सड़क के किनारे लगे वो बड़े बड़े पेड़ जो उस सड़क को लगभग एक हरी भरी गुफ़ा में बदल देते हैं जब ऐसे इलाकों से निकलते हुए अपने होटेल की और बढ़ रहे हैं तो विशाखापत्तनम आने के अपने फ़ैसले पर फूले नहीं समाता लेकिन शहर का ये मिज़ाज बदलने का नाम नहीं ले रहा ।

20200109_124923फिर से दोनों और की बाउंड्री वाल पर बनी पेन्टिंग्स जो विशाखपत्तनम की संस्कृति, इतिहास, विरासतों को कहीं ना कहीं दर्शा रही हैं उसके बाद एक लंबे फ्लाईओवर को पार कर एक सुंदर व आधुनिक इलाके में प्रवेश करते हैं जहाँ बड़े बड़े शोरूम है, ईमारते हैं, मॉल हैं, पता चलता है यह इलाका है वाल्टेयर अपलैंडस है, यह नाम विशाखापत्तनम के ब्रिटिश उपनिवैशिक कनेक्शन को बहुत खूबसूरती से दर्शाता है। ब्रिटिश कॉल में यहाँ पर वाल्टेयर रेलवे डिवीज़न की नींव पड़ी थी। “वाल्टेयर” केवल एक नाम मुझे उस ज़माने की तस्वीर बनाने पर विवश करता है जो शायद विशाखापत्तनम की ब्रिटिश उपनिवैशिक समय की रही होगी।

20200109_171213

तस्वीर बनाता हूँ और मिटा देता हूँ ठीक से बन नहीं पा रही, या तो कल्पना की कमी है या फिर उसमें भरे जाने वाले रंगों की। कुछ आगे चल कर एक चौराहे पर दिखती है दिल्ली के कनॉट प्लेस जैसी एक तिकोनी इमारत। आगे चलने पर दिखते हैं बड़े बड़े चौराहे, चौराहों के बीच बने हरी भरी घास के छोटे छोटे पार्क जहाँ बने हैं डायनासोर के प्रतिरूप जिसे देखते ही बच्चे उछल पड़ते हैं अपनी सीटों से। कुछ ही और दूर जाकर एक यू टर्न लेने के बाद हम पहुंच जाते हैं अपनी मंज़िल द पार्क विशाखापत्तनम।

– सचिन देव शर्मा

3 thoughts on “द सिटी ऑफ़ डेस्टिनी

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s