अनोखा है लड़ाकू विमान देखने का यह अनुभव

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लड़ाकू जहाज़ों में बैठना तो छोड़िए पास से देखना भी किसी आम आदमी के लिए मुश्किल है लेकिन विशाखापत्तनम स्थित टीयू -142 एम एयरक्राफ्ट म्यूजियम ने विशाखापत्तनम आने वाले सभी सैलानियों के लिए इस काम को बहुत आसान कर दिया है।

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म्यूजियम के बारे में जानने से पहले आइए जानते हैं टीयू 142 एम की कहानी और कारनामों के बारे में। इस जहाज़ की कहानी और कारनामें दोनों ही अपने आप में एक मिसाल है। एक रशियन एरोनॉटिकल इंजीनियर थे अन्द्रेई टुपोलेव, इंजीनियर होने के साथ साथ सेना में अफ़सर भी थे। टुपोलेव को  बचपन से ही हवाई यंत्रों से इश्क़ था। 1909 में यूनिवर्सिटी में पढ़ते पढ़ते ही वो एक एरोनॉटिक्स ग्रुप में शामिल हो गए, इस ग्रुप के संस्थापक थे प्रसिद्ध रशियन वैज्ञानिक निकोले जहुकोव्स्की, जोकि आधुनिक ऐरो व हाइड्रोडायनामिक्स के जनक माने जाते हैं। टुपोलेव ने एक साल के अंदर ही अपना पहला सेलप्लेन (एक तरह का ग्लाइडर) बनाया और उसमें बैठकर उड़ान भी भरी। टुपोलेव ने उस समय इस तरह के हवाई जहाज़ बनाए जो रशिया (तत्कालीन यू एस एस आर) से संयुक्त राष्ट्र अमेरिका तक वाया नॉर्थपोल उड़ान भर सकते थे।

जी हाँ, इसी महान इंजीनियर ने TU-142 M (टी यू – 142 एम) को डिज़ाइन किया था।  टी यू – 142 एम एक टोही और एंटी सबमरीन लड़ाकू विमान है। इस लड़ाकू जहाज़ ने श्रीलंका में भारतीय सेना के पीस ऑपरेशन्स व 1988 में मालद्वीप में ऑपेरशन कैक्टस के दौरान मालद्वीप के तत्कालीन राष्ट्रपति गयूम की सरकार के तख्तापलट की तमाम कोशिशों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी।

भारतीय नौसेना के टीयू -142 एम विमान को 30 साल की सेवा के बाद डीकमीशन कर म्यूजियम में कन्वर्ट कर विशाखापत्तनम में डॉ एनटीआर रोड पर बीच के दूसरी ओर रखा गया है। सबमरीन म्यूजियम के ठीक सामने व आर के बीच के पास यह म्यूजियम एक प्रमुख टूरिस्ट अट्रैक्शन है । यह म्यूजियम 8 दिसंबर 2017 को अस्तित्व में आया। जहाँ विमान को म्यूजियम में परिवर्तित किया गया है वहीं विमान को अंदर से देखने से पहले एक अन्य प्रदर्शनी गैलरी से गुजरना पड़ता है जहाँ पर टीयू – 142 एम विमान के कुछ हिस्सों व् उपकरणों को प्रदर्शित किया गया है। ब्लैक बॉक्स, पायलट स्टेशन, एयर बोटल, ऑक्सीजन टैंक, टर्बो जनरेटर, प्रोपेलर, प्रोपेलर हब, इंजन, सोनोबुइयोज, पैराशूट, लाइफ राफ्ट, टायर्स आदि उपकरणों को पूरे डिटेल के साथ प्रदर्शित किया जाता है, विमान के इन हिस्सों और अन्य उपकरणों की प्रदर्शनी को एक ऑडियो टूर के साथ साथ देख सकते हैं और उसके बाद इस लड़ाकू विमान को अंदर से देख सकते हैं।

प्रदर्शनी में विमान को होलोग्राफी के माध्यम से भी दर्शाया गया है व् विमान में काम करने वाले कर्मचारियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई है।

ज्यों ही टिकट लेकर म्यूजियम में दाख़िल होते हैं आपको हैडसेट वाला एक मोबाइल दे दिया जाता है और आपके कपड़ों में एक मैग्नेटिक टैग लगा दिया जाता है, यह टैग ठीक वैसा ही होता है जैसे कि कपड़ों के शोरूम्स में कपड़ों के साथ लगा रहता है और जब आप कपड़े खरीद कर बिलिंग कराते हो तो इसको निकाल लिया जाता है। हैडसेट वाला यह मोबाइल केवल वयस्कों के लिए ही है, बच्चों को पढ़कर ही जानकारी मिल पाती है। जैसे ही आप प्रदर्शनी में दाखिल होते हैं वैसे ही आप जिस भी हिस्से या उपकरण के बारें में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं मोबाइल स्क्रीन पर उस उपकरण का नंबर प्रेस करने पर उस उपकरण के बारें में जानकारी प्राप्त हो जाती है। ऑडियो टूर के साथ इस प्रदर्शनी को देखने में 30-40 मिनट्स तो कम से कम लग ही जाते हैं। उसके बाद ही आप म्यूजियम में तब्दील हुए टीयू – 142 एम एयरक्राफ्ट के अंदर कदम रख उसे देख सकते है। आसमान में अठखेलियाँ करते जहाज़ जहाँ एक छोटी सी चिड़िया जैसे लगते हैं वहीं इस लड़ाकू विमान के विशालकाय आकार को अपनी आँखों से देखकर मैं आश्चर्य चकित था।

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जहाँ एक और यह म्यूजियम इस विमान व भारतीय नौ सेना के हवाई बेड़े के इतिहास को दर्शाता है वहीं संग्रहालय के बाहरी भाग में बना वर्चुअल रियलिटी गेम सेक्शन बड़ों और बच्चों दोनों के मनोरंजन के लिए एक शानदार जगह है। यदि आप विशाखापत्तनम जाएं तो टीयू – 142 एम म्यूजियम देखना ना भूलें।

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-सचिन देव शर्मा

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