About Yatravrit

अनेक घुमक्कङों ने अकेले ही सुदूर प्रदेशों एवं देशों के जाने-अनजाने, सुगम-दुर्गम स्थानों की यात्राएं की हैं और अपने यात्रा संस्मरणों को बहुत ही रुचिपूर्ण तरीक़े से एक दिलचस्प कहानी के रूप में प्रस्तुत करते हुए सहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। इन्हीं घुमक्कड़ों ने यात्रा वृतांत की परम्परा को आगे बढ़ाने का काम किया है।  काश हर कोई उन महान यायावरों की भांति एक स्वछंद पक्षी की तरह उड़ान भर सकता, पर प्रश्न यह है कि क्या एक आम व्यक्ति भी उन महान घुमक्कड़ों की भांति यात्रा कर सकता है? यदि उत्तर “ना” है तो दूसरा प्रश्न यह है कि यदि वह जैसे भी, जिस भी उद्देश्य से यात्रा करता है तो क्या अपने यात्रा संस्मरणों को कलमबद्ध कर सकता है?

आज जहां आधुनिकता, महानगरों की जीवन शैली और जीवन की दौड़ में पीछे छूट जाने का डर आदमी को रोजीरोटी की भाग दौड़ में धकेलता है वहीं अपने मन की आवाज़, अपने और दूसरे लोगों के लिए कुछ करने का संकल्प व्यक्ति को कुछ नया, कुछ इतर करने की प्रेरणा देता है।

जीवन की इसी कसमकश के बीच जैसे तैसे एक माध्यमवर्गीय शहरी यात्रा के लिए समय निकलता है और निकल पड़ता है अपने परिवार के साथ।

“यात्रावृत” एक ऐसा प्रयास है जो एक मध्यमवर्गीय पारिवारिक यात्री को उनके यात्रा अनुभवों को यात्रा लेखक समुदाय एवं यात्रियों के साथ साझा करने का अवसर देने के साथ साथ उनको यात्रा अनुभव लिखने के लिए प्रेरित भी करता है।

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