Founder of Yatravrit

Sachin Dev Sharma is an Indian Author, Travel Reviewer, Blogger and author of “Dosti Ek Yatra”. Reading, writing, poetry, travelling and photography are some of the areas where his interest lies. He is an admirer of culture and tradition of India and has a strong desire to learn and understand about cultures, social setups and historical importance of places across India and this urge make him travel in different geographies in Indian Territory.

Sachin is a regular contributor on Tripadvisor and various other travel reviews & blog sites. He is popularly known as “Sameekshak Sachin” being the author of various travel reviews. Reviews of the hotels and tourist attractions of 47 cities on Tripadvisor goes to his credit. He enjoys the readership of more than 57,000 readers on Tripadvisor. One of his travelogue “Kolkata Karyalaya Mein Ek Din ( A Day in Kolkata Office )” has been published in quarterly hindi magazine “Maun Mukhar” in its January – March 2019. His another travelogue “Lhasa Nahi…Lavasa ( It’s not Lhasa…It’s Lavasa )” was long-listed at “I Write My Stories” , an initiative of Jaipur Book Mark 2019 which was the business segment of Jaipur Literature Festival 2019. His Book “Dosti Ek Yatra” has been featured in “Uttaranchal Patrika” ( A popular magazine of Uttarakhand ) in its August 2017 issue. He is the founder of “Yatravrit” Blog. “Yatravrit” gives an opportunity to travel bloggers to share their travelling experiences with travel writers community and travelers. “Yatravrit” also motivates a normal family traveler to write and share his travelling experiences.

He is an HR Professional. He pursued Post Graduate Diploma in Management from Birla Institute of Management Technology. Presently he is working with a German Multinational Company in Gurugram as Expert – Talent Management & Organizational Development. He has been invited by Birla Institute of Management Technology, Greater Noida for addressing their students from time to time. He has been the selection process panelist with Welingkar Institute of Management ( we school).

His book “Dosti Ek Yatra” is a travel story of his travel to Chandigarh and Kasauli in the month of December 2015. This book is an endeavor by Sachin to share his travelling experiences with the readers and does not only present the description of places and tourist attractions but also portrays the emotional bonding between two school time friends and making of a relationship between their families. Most of the characters of this travel story got acquainted with each other first time and the success of relationships made during the travel decided the future of this travel story as a book.

This book also tries to depict the social life of two educated youth who are working with the private sector organizations and living in metropolitan cities and the way they escape from the hustle and bustle of their daily life to reinvent relationship with the hope to get that true and selfless relation which they have been tired of searching in metropolitan cities.

सचिन देव शर्मा एक भारतीय लेखक, यात्रा समीक्षक एवं ब्लॉगर हैं। किताबें पढ़ना, लेखन, काव्य, यात्रा करना और फोटोग्राफी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ उनकी रुचि निहित है। वह भारत की संस्कृति और परंपरा के प्रशंसक हैं और भारत के विभिन्न स्थानों की संस्कृतियों, सामाजिक ढाँचों और ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानने और समझने की तीव्र इच्छा रखते हैं और यह कारण उन्हें भारत में विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में यात्रा करने के लिए प्रेरित करता है।

ट्रिपएडवाइजर एवं अन्य यात्रा और ब्लॉग वेबसाइट्स पर सचिन देव शर्मा की यात्रा समीक्षाएं नियमित रूप से प्रकाशित होती रही हैं। उनके द्वारा लिखी गई यात्रा समीक्षाओं के कारण वो  “समीक्षक सचिन” के उपनाम से लोकप्रिय हैं। ट्रिपएडवाइजर वेबसाइट पर 47 शहरों के होटल और पर्यटक आकर्षणों की समीक्षा करने का श्रेय उनको जाता है। 57,000 से अधिक पाठक ट्रिपएडवाइजर वेबसाइट पर उनके द्वारा लिखी गई यात्रा समीक्षाएँ पढ़ चुके हैं।  उनका यात्रा वृतांत ” कोलकाता कार्यालय में एक दिन” हिंदी की प्रमुख त्रैमासिक पत्रिका “मौन मुखर” ने अपने जनवरी-मार्च 2019 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया है। उनका यात्रावृतांत “ल्हासा नहीं… लवासा” जयपुर बुक मार्क 2019 जो कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का व्यापारिक खंड है, की पहल “आई राइट माई स्टोरीज ” के अन्तर्गत अभिस्वीकृत किया गया है। उनकी किताब “दोस्ती एक यात्रा” उत्तराखंड की लोकप्रिय “उत्तरांचल पत्रिका ” के अगस्त 2017 के अंक में फीचर हो चुकी है। वह “यात्रावृत” नामक यात्रा ब्लॉग के संस्थापक हैं। “यात्रावृत” एक ऐसा ब्लॉग है जो यात्रा ब्लॉगर्स को उनके यात्रा अनुभवों को यात्रा लेखन समुदाय एवं यात्रियों के साथ साझा करने का अवसर देने के साथ साथ एक आम पारिवारिक यात्री को भी उसके यात्रा अनुभव लिखने के लिए प्रेरित करता है।

व्यवसाय से सचिन देव शर्मा, एक मानव संसाधन विशेषज्ञ हैं। वह “बिरला प्रबंधन तकनीक संस्थान” से प्रबंधन में स्नातकोत्तर हैं एवं वर्तमान में एक जर्मन बहुराष्ट्रीय कंपनी के गुरुग्राम स्तिथ कार्यालय में विशेषज्ञ – प्रतिभा प्रबंधन एवं संगठनात्मक विकास  के पद पर कार्यरत हैं। उनको बिरला प्रबंधन तकनीक संस्थान, वृहत्तर नोएडा द्वारा समय-समय पर प्रबंधन के छात्रों को संबोधित करने के लिए बुलाया जाता रहा है। वो वेलिंगकर प्रबंधन संस्थान ( वी स्कूल ) द्वारा उनके चयन प्रक्रिया के सदस्य के रूप में आमंत्रित किये जा चुके हैं।

सचिन देव शर्मा की किताब “दोस्ती एक यात्रा” उनके द्वारा दिसम्बर 2015 में की गई उनकी चंडीगढ़ और कसौली की यात्रा का वृतान्त है। यह यात्रा वृतांत उनके अनुभवों को पाठकों के साथ साझा करने का एक ऐसा प्रयास है जो ना केवल स्थानों और पर्यटन स्थलों का विवरण पेश कर रहा है वरन एक ऐसी यात्रा की कहानी बयान करता है जो बरसोें के बाद मिल रहे स्कूल के समय के दो दोस्तों और उनके परिवारों के बीच के भावनात्मक पहलुओं को भी दर्शाता है।

ये यात्रा इस मायने में बहुत महत्वपूर्ण थी कि उनका स्थानों के साथ तो परिचय होना ही था साथ-साथ इस वृतान्त के महत्वपूर्ण चरित्रों का भी आपस में परिचय होना था। यात्रा के दौरान बने इन रिश्तों की सफलता ने ही इस यात्रा वृतांत का भविष्य एक किताब के रूप में निश्चित किया है। ये यात्रा वृतान्त महानगरों में रहने वाले और निजि क्षेत्र में काम करने वाले उन दो शिक्षित युवाओं के सामाजिक जीवन को भी दर्शाने का प्रयास है जो जीवन की भाग दौड़ से यात्रा के लिए समय निकालकर अपने पुराने सम्बंधों को इस उम्मीद के साथ पुर्नजीवित करना चाहते हैं कि क्या पता फिर से वो सच्चा और निस्वार्थ सम्बंध मिल जाये जिसे महानगर में ढूँढते हुऐ वो थक चुके हैं।

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